About Jagguka Educational Institute

भगवदगीता के अनुसार "" योगः कर्मसु कौशलम् " अर्थात कर्म की कुशलता ही योग है, यही योग मोक्ष का साधन है| परीक्षार्थियो के लिए तो परीक्षा मे सफलता प्राप्त करना ही मोक्ष है| जिसके माध्यम से वे अपने व्यक्तित्व को नये आयाम दे सकते है| इस सफलता रूपी मंज़िल के लिए आवश्यक है कि आप खुली आँखो से सपने देखे एव हौसलों को बरकरार रखे क्योंकि

"मंजिल उन्हीं को मिलती है; जिनके सपनो में जान होती है;
पंख से कुछ नहीं होता; हौंसलों से ही उड़ान होती है।"

दोस्तो, पिछली सफलता एव असफलता दोनो को ही भुला दीजिए, क्योंकि आपका लक्ष्य तो इस परीक्षा मे सफल होना है| इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अवशेस समय का पूर्ण ईमानदारी एव निष्ठा के साथ पूर्ण सदुपयोग कीजिए और कठिन से कठिन परिश्रम कीजिए, क्योंकि

"पसीने की स्याही से जो लिखते हैं अपने इरादों को,
उनके मुक़द्दर के पन्ने कभी कोरे नहीं हुआ करते|"

दोस्तों,आपकी सफलता का आधार तो कर्म एवं मेहनत ही है लेकिन उस कर्म में कुशलता लाने के लिए तथा मेहनत को सही दिशा प्रदान करने के लिए हमने इस संदेश के माध्यम से प्रयत्न किया है, जो निश्चय ही आपके सपनों को साकार करने में सहायक होगा |